उड़ जाएगा हंस अकेला...: उबाऊ प्रार्थना

कौशलेंद्र प्रपन्न

स्कूलों में आज भी उबाऊ प्रार्थना जारी है। तकरीबन बीस साल पहले प्रो. कृष्ण कुमार जी ने स्कूली प्रार्थना का विश्लेषण शिक्षा समाज को दिया था। जो पढ़ना चाहें वे बच्चों की भाषाः अध्यापक निर्देशिका में पढ़ सकते हैं।

स्कूलों में प्रार्थना जिस बेरूखी और उबाऊ तरीके से होती है कि जिसे सुनकर लगता है इससे अच्छा न हो। यह बरताव न केवल प्रार्थना के साथ किया जाता है बल्कि राष्ट्र गान भी उसमें शामिल है। कभी कभी स्कूलों में होने वाले प्रार्थना और राष्ट्र गान को सुनता हूं तजो लगता है हमारे बच्चे और शिक्षक किस स्तर तक उच्चारण के जरिए अर्थ का अनर्थ करते हैं।

उड़ जाएगा हंस अकेला...: शिक्षा और परीक्षा पाटन के बीच

कौशलेंद्र प्रपन्न

शिक्षा और परीक्षा दो पाटन के बीच में बच्चे साबूत नहीं बचे। यह सिलसिला जमाने से बतौर जारी है। लेकिन हालिया घटनाएं बताती हैं कि शिक्षा अब डराने लगी है। परीक्षा तो उससे भी एक कदम आगे बढ़ चुकी है।

शिक्षा के बारे में माना जाता है कि यह इनसान को बेहतर बनाती है। लेकिन हक़कीतन ऐसा नहीं है। बच्चे आत्महत्या करते हैं तो इसमें शिक्षा भी कहीं बदनाम होती है। क्योंकि शिक्षा मृत्यु नहीं बल्कि जीना सीखाती है। बेहतर जीने की कला देती है ऐसा माना गया है।

Pre-primary schools: Gujarat govt fails to make proactive effort to implement child rights

By Mujahid Nafees

The Indian Constitution secures the rights of children up to the age 6 under Article 45 as part of the directive principles of state policy. The Government of India launched Integrated Child Development Services (ICDS) scheme on 2nd October 1975. The beneficiaries under the scheme are children, pregnant women, and lactating mothers. ICDS offers a package of six services:

Removal of No Detention Policy will be disastrous for the RTE Act

The Right to Education (RTE) strongly condemns the proposal of the Delhi government to amend the RTE ACT, 2009, calling the move completely illegal and against the fundamental right to education. Mr. Ambarish Rai, Convener, RTE Forum stated that ‘The consequence of detaining a child in the same class works adversely on the child’s psyche and has an impact on his/her self-esteem.

Will Fear of ‘Failing’ Make India Literate?

With the largest population of illiterate adults in the world, one wonders where we are headed as a growing economy. While India’s national literacy rate is 74.04 percent, it is estimated that India can achieve the goal of primary education only by 2050. Simply put, even if we do achieve our goals, we will be half a century late.

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